सबसे मुश्किल कार्य देश को बदलना नहीं, खुद में बदलाव लाना है|

भारत और दंगे!!!

कुछ दिन पहले की ही बात है, हिंदुस्तान टाईम्स में छपे एक लेख ने मेरा ध्यान आकर्षित किया| वह लेख भारत मेंहुए जाने माने गोधरा काण्ड के बारे में था| ऐसा नही है कि मुझे इस हादसे की जानकारी नही थी, बस हुआ कुछ यूँकी में उस लेख को पढने के लिए जिज्ञासु हो गया| उस अतिउत्तम लेख को पढने के साथ ही मैंने गूगल पे लोग इनकर के भारत में हुए कई दंगो के बारे में सूचना इकट्ठी करी| दंगो के बारे में जानकारी पढ़के केवल मेरे होश उड़गए, साथ ही मेरी भावनाएं उत्तेजित हो गई| गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगे, गोधरा ट्रेन को जलाये जाने का हीपरिणाम था| सितम्बर २००८ को, गोधरा कमीशन की रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि की थी कि गोधरा ट्रेन कोमुसलमानों के एक गुट्ट द्वारा जला दिया गया था|

एक ऐसी घटना जिसने मुझे असमंजस में डाल दिया, थी, एक पूर्व कांग्रेस एम् पी, एहसान जाफरी की हत्या| एहसान जाफरी को एक हिंदू समूह ने घेर लिया था| सूत्रों की मानें तो एहसान ने पुलिस, आदि मंत्रियों, एवं गुजरातके मुख्यमंत्री से भी सहायता का अनुरोध किया था, किंतु उनकी सहायता को कोई नही आया| अंततः, उन्हें और ५०आदि मुसलमानों को जिंदा जला दिया गया था| सरकारी सूत्रों की मानें तो कुल मिला कर करीब १०४४ लोगों कीहत्या हुई, जिसमें २५४हिंदू, और ७९० मुस्लिम थे|

इन दंगो के बारे में जान कर मेरी जिज्ञासा और बढ़ गई| मैंने भारत में हुए सब ही दंगो के बारे में जानकारी इकठ्ठाकी एवं उसे पढ़ा| इन सब ही दंगो के बारे में पढ़ कर मुझे ऐसा महसूस हुआ कि दंगे, भारत में एक ढंग बन गए हैं| अगर हलकी सी भी तकलीफ हुई तो लोग मार-काट करने पर उतावले हो उठते हैं| भारत वासियों को, एकजमूरियत का हिस्सा होने के नाते इन सब ही हादसों कि निंदा करनी चाहिए| हमें धर्म एवं जाती से पहले देश केबारे में सोचना चाहिए| क्या हम दूसरों के हाथों की कटपुतली हैं? क्या हमने चूडियाँ पहनी हुई हैं?
आवाज़ उठाओ, विचार बदलो!!!

 
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